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6 महीने के बच्चे को कितना खाना खिलाएं?
शुरुआती छोटी मात्रा, भूख और पेट भरने के संकेत, और सख्त समय-सारणी के बिना दूध व ठोस आहार का तालमेल।

माँ का दूध या शिशु फ़ॉर्मूला पहले पूरे साल में शिशु के पोषण का मुख्य स्रोत बना रहता है। जब आप ठोस आहार शुरू करते हैं, तो आप दूध की जगह उसे नहीं दे रहे होते — आप दूध के साथ कुछ नया जोड़ रहे होते हैं।
पहले कुछ चम्मच
कितना दें
लगभग 1 से 2 चाय के चम्मच से शुरू करें। शुरुआत में दिन में एक बार देना काफ़ी है।
यह क्रम आज़माना मददगार हो सकता है
- तेज़ भूख थोड़ी कम करने के लिए पहले थोड़ा माँ का दूध या शिशु फ़ॉर्मूला दें।
- ठोस आहार दें।
- अंत में थोड़ा और दूध दें।
इससे भोजन के समय जल्दबाज़ी कम होती है और पूरी प्रक्रिया कम परेशान करने वाली होती है।
शिशु के संकेतों के अनुसार चलें
शिशु आपको बताएगा कि उसे क्या चाहिए — आपको बस उसके संकेतों पर ध्यान देना है।
और खाने की इच्छा के संकेत: आगे झुकना, खाने की ओर हाथ बढ़ाना, मुँह खोलना।
खाना पूरा हो जाने के संकेत: सिर दूसरी ओर घुमाना, मुँह बंद रखना, खाने को दूर धकेलना, पीछे झुकना।
जब शिशु पेट भरने के संकेत दे, तो खाना खिलाना रोक दें — भले ही आपको लगे कि उसने लगभग कुछ भी नहीं खाया है। उसे एक और कौर खाने के लिए न मनाएँ, खेल के ज़रिए उसका ध्यान भटकाकर न खिलाएँ और खाने को ज़्यादा आकर्षक बनाने के लिए उसमें मिठास लाने वाली कोई चीज़ न मिलाएँ। अगर वह रो रहा है या मुँह फेर रहा है, तो भोजन का समय समाप्त हो गया है।
भूख का अनुमान लगाना मुश्किल होगा — यह सामान्य है
कुछ दिनों में शिशु अच्छी तरह खाएगा। दूसरे दिनों में वह खाने को मुश्किल से छुएगा या पूरी तरह मना कर देगा। दोनों ही बिल्कुल सामान्य हैं।
शिशु की भूख हर दिन अलग हो सकती है, और उसे पूरी परोसी हुई मात्रा ख़त्म करने के लिए प्रोत्साहित करने की ज़रूरत नहीं है। हर बार कितना खाना है, यह शिशु को तय करने दें।
क्या न करें
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खाने के लिए ज़बरदस्ती न करें और दबाव न डालें।
शिशु को कभी भी प्लेट में रखा सारा खाना ख़त्म करने या वह खाना खाने के लिए मजबूर न करें जिसे वह खाने से मना कर रहा है।
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ज़्यादा खाना खिलाने के लिए तरकीबों या खेलों का इस्तेमाल न करें।
चम्मच को हवाई जहाज़ बनाकर खिलाना, लालच देना और ध्यान भटकाने की तरकीबें नुकसानरहित लग सकती हैं, लेकिन ये शिशु की अपनी भूख पहचानने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता में बाधा डालती हैं।
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खाने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर मीठी चीज़ें न दें।
मुख्य खाना खिलाने के लिए कोई मीठी चीज़ देना उचित नहीं माना जाता।
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शिशु को शांत करने या इनाम देने के लिए खाने का इस्तेमाल न करें।
खाने का संबंध भूख से बना रहे तो सबसे अच्छा रहता है, भावनाओं या व्यवहार से नहीं।
किसी विशेषज्ञ से कब बात करें
अगर आप निश्चित नहीं हैं कि शिशु तैयार है या नहीं, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें। शिशु की स्थिति के अनुसार सलाह लेना ख़ास तौर पर ज़रूरी है, अगर:
- शिशु का जन्म समय से पहले हुआ था
- जन्म के समय शिशु का वज़न कम था
- शिशु के विकास में ऐसी देरी है जो उसकी हरकतों या उनके तालमेल को प्रभावित करती है
- शिशु को कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है जो खाने-पीने को प्रभावित कर सकती है
स्रोत (अंग्रेज़ी में)
- NHS · Your baby’s first solid foods ↗
- CDC · When, what, and how to introduce solid foods ↗
- CDC · Signs your child is hungry or full ↗
- CDC · How much and how often to feed ↗
- CDC · Choking hazards ↗
सामान्य जानकारी व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। शिशु के खानपान को लेकर चिंता होने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें।
