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6 महीने के बच्चे का आहार: ठोस आहार का पहला सप्ताह

लगभग 6 महीने पर तैयारी के संकेत, पहले कुछ चम्मच और दूध के साथ ठोस आहार की सहज शुरुआत।

शिशु अपने हाथों से नरम भोजन खा रहा है और माँ पास बैठकर देख रही हैं।

ठोस आहार शुरू करना आमतौर पर एक धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया है। शुरुआत में शिशु को अपनी ज़रूरत का अधिकांश पोषण अभी भी माँ के दूध या शिशु फ़ॉर्मूला से मिलेगा। शुरू में ठोस आहार का मुख्य उद्देश्य नए कौशल सीखना, नए टेक्सचर का आदी होना और खाने की प्रक्रिया से परिचित होना है। शांत और सरल शुरुआत आमतौर पर सबसे अच्छी होती है।

शिशु के ठोस आहार के लिए तैयार होने के संकेत

उम्र एक उपयोगी शुरुआती संकेत देती है, लेकिन अपने आप में यह काफ़ी नहीं है। कुछ शिशुओं में तैयारी के संकेत थोड़े पहले दिखते हैं, जबकि कुछ को ज़्यादा समय चाहिए होता है।

आमतौर पर शिशु को ठोस आहार खाना शुरू करने के लिए तैयार तब माना जाता है, जब विकास से जुड़े कई मुख्य संकेत एक साथ दिखें:

  • सिर को स्थिर रखते हुए बैठता है

    शिशु सहारे से सीधा बैठ सकता है, आगे झुक सकता है और अपने सिर को स्थिर रख सकता है।

  • खाने में रुचि दिखाता है

    शिशु दूसरों को खाते हुए ध्यान से देखता है, खाने की ओर हाथ बढ़ाता है या खाना पास आने पर मुँह खोलता है।

  • खाना मुँह तक लाता है

    शिशु खाने को देख सकता है, उसे उठा सकता है और अपने मुँह तक ला सकता है।

  • खाना निगलता है

    शिशु खाने को जीभ से तुरंत वापस बाहर धकेलने के बजाय उसे मुँह में रख सकता है और निगल सकता है।

  • पेट भरने का संकेत देता है

    पेट भरने पर शिशु सिर दूसरी ओर घुमा लेता है, पीछे झुकता है, मुँह बंद कर लेता है या खाने में रुचि खो देता है।

तैयारी करें

थोड़ी-सी तैयारी से शुरुआती भोजन का समय अधिक शांत और आसान हो सकता है।

  • सही समय चुनें

    ऐसा समय चुनें जब आप जल्दी में न हों और शिशु सतर्क और अच्छे मूड में हो — बहुत थका हुआ या बहुत भूखा न हो।

  • ज़रूरी व्यवस्था करें

    शुरू करने से पहले शिशु को खाने की ऊँची कुर्सी में सीधा बैठाएँ। आपको एक छोटा चम्मच भी चाहिए — शिशु के आकार के हिसाब से बना हुआ, आम चाय का चम्मच नहीं।

  • ध्यान भटकाने वाली चीज़ें हटाएँ

    टीवी बंद करें और फ़ोन दूर रख दें। खाना एक नया कौशल है और शिशु को उस पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

  • आमने-सामने बैठें

    शिशु के सामने बैठें ताकि आप उससे नज़रें मिला सकें और भोजन पर ध्यान बनाए रख सकें। भोजन के दौरान उससे धीमी आवाज़ में बात करें।

  • खाना बिखरने के लिए तैयार रहें

    शुरुआती खाने का अधिकांश हिस्सा शिशु के चेहरे, हाथों, बिब या फ़र्श पर पहुँच जाएगा। यह पूरी तरह सामान्य है — पास में एक कपड़ा रखें और शांत रहने की कोशिश करें। शिशु को खाना छूने और उसे जानने का मौका देने से समय के साथ उसे खुद खाना सीखने में मदद मिलती है।

पहले कुछ चम्मच

कितना दें
लगभग 1 से 2 चाय के चम्मच से शुरू करें। शुरुआत में दिन में एक बार देना काफ़ी है।

यह क्रम आज़माना मददगार हो सकता है

  1. तेज़ भूख थोड़ी कम करने के लिए पहले थोड़ा माँ का दूध या शिशु फ़ॉर्मूला दें।
  2. ठोस आहार दें।
  3. अंत में थोड़ा और दूध दें।

इससे भोजन के समय जल्दबाज़ी कम होती है और पूरी प्रक्रिया कम परेशान करने वाली होती है।

सुरक्षा की याद दिलाने वाली बातें

  • हमेशा पास रहें

    भोजन के दौरान शिशु को कभी अकेला न छोड़ें। खाने के गले में अटकने या किसी भी अप्रत्याशित प्रतिक्रिया पर नज़र रखने के लिए आपका वहाँ होना ज़रूरी है।

  • बोतल में शिशु अनाज न मिलाएँ

    बोतल में शिशु अनाज मिलाने से गले में अटकने का जोखिम होता है, वज़न ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ सकता है और शिशु चम्मच से खाना सीख नहीं पाता।

  • नमक या चीनी न मिलाएँ

    नमक शिशु के विकसित हो रहे गुर्दों पर दबाव डालता है। चीनी दाँतों में सड़न को बढ़ावा देती है और कम उम्र में ही मीठे खाने के प्रति पसंद पैदा करती है। शिशु के भोजन में इन दोनों में से कोई भी नहीं होना चाहिए।

किसी विशेषज्ञ से कब बात करें

अगर आप निश्चित नहीं हैं कि शिशु तैयार है या नहीं, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें। शिशु की स्थिति के अनुसार सलाह लेना ख़ास तौर पर ज़रूरी है, अगर:

  • शिशु का जन्म समय से पहले हुआ था
  • जन्म के समय शिशु का वज़न कम था
  • शिशु के विकास में ऐसी देरी है जो उसकी हरकतों या उनके तालमेल को प्रभावित करती है
  • शिशु को कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है जो खाने-पीने को प्रभावित कर सकती है

स्रोत (अंग्रेज़ी में)

सामान्य जानकारी व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। शिशु के खानपान को लेकर चिंता होने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें।